NRC क्या हे कौन से राज्य में NRC लागु होगा

क्या है NRC? क्यों मचा है बवाल?

NRC उन्हीं राज्यों में लागू होता है जहां अन्य देश के नागरिक भारत में चोरी-छिपे आ जाते हैं. ऐसे में एनआरसी पर जिम्मा होता है कि वह भारतीय नागरिकों की पहचान करें. NRC की रिपोर्ट ही तय करती है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं. एनआरसी के आज जारी किए गए ड्राफ्ट में उन भारतीय नागरिकों के नाम शामिल हैं जो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रह रहै हैं. 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो कुछ लोग असम से तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (मौजूदा बांग्लादेश) चले गए. उन लोगों की जमीनें असम में थीं, लिहाजा बंटवारे के बाद भी उन लोगों का दोनों ओर आना-जाना जारी रहा.

1985 में लागू हुआ असम समझौता


बंटवारे के बाद बांग्लादेश से आने वाले अवैध आप्रवासियों की पहचान के लिए राज्य में 1951 में पहली बार NRC को अपडेट किया गया था. 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद काफी संख्या में असम में शरणार्थी पहुंचे. शरणार्थियों के असम में घुसने से राज्य की आबादी का स्वरूप ही बदलने लगा. ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने 80 के दशक की शुरुआत में असम आंदोलन की शुरूआत की. 15 अगस्त 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. समझौते के अनुसार, 25 मार्च 1971 के बाद से असम में अवैध रूप से रह रहै लोगों के नाम NRC में शामिल नहीं होंगे. इसमें एनआरसी को अपडेट करने की भी बात कही गई.

असम में सिटिजन रजिस्टर का फाइनल ड्राफ्ट जारी, यहां चेक करें अपना नाम @ NRCassam.nic.in

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने NRC को अपडेट करने का फैसला किया
साल 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1951 के NRC को अपडेट करने का फैसला किया. विवाद बढ़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. 2015 में शीर्ष अदालत की निगरानी में IAS अधिकारी प्रतीक हजेला को एनआरसी अपडेट करने का काम सौंपा गया. जिसके बाद एनआरसी के रजिस्ट्रार जनरल की देखरेख में एनआरसी केंद्र खोले गए. असम में रह रहै लोगों के दस्तावेजों की जांच शुरू हुई. तय किया गया कि जिनके पूर्वजों के नाम 1951 के एनआरसी में या 25 मार्च, 1971 तक के किसी वोटर लिस्ट में मौजूद हों, उन्है ं भारतीय नागरिक माना जाएगा.

1.9 करोड़ को जनवरी में मिली थी भारतीय नागरिकता


12 अन्य सर्टिफिकेट्स या कागजात जैसे जमीन की रजिस्ट्री आदि के कागज, स्कूल-कॉलेज के सर्टिफिकेट्स, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, अदालत के दस्तावेजों को भी अपनी नागरिकता साबित करने का पैमाना निर्धारित किया गया. असम में इसी साल जनवरी में 3.29 आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम भारतीय नागरिकों के तौर पर दर्ज कर दिए गए. 30 जुलाई को कथित अंतिम मसौदा जारी किया जाना था. 40 लाख लोगों के नाम मसौदे में नहीं होने पर संसद में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं उन्है ं घबराने की जरूरत नहीं है. वह लोग 30 अगस्त से NRC केंद्रों पर अपनी शिकायत और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. बहरहाल यह उन 40 लाख लोगों के लिए फौरी राहत जरूर है लेकिन आने वाले समय में इसे लेकर विवाद का एक और चेहरा जरूर सामने आएगा.

किस राज्य में हो गई NRC लागु

मोदी सरकार की पूरे देश में एनआरसी की तैयारी, अब हर व्यक्ति की होगी पहचान

सरकार ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को देशभर में लागू करने से पहले उसका आधार तैयार करने के लिए सितंबर, 2020 तक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) तैयार करने का फैसला किया है। भारत के प्रत्येक निवासी को एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसका मकसद देश में रहने वाले हर सामान्य निवासी की पहचान का व्यापक डाटाबेस तैयार करना है। इस डाटाबेस में जनसांख्यिकी के साथ-साथ बायोमेट्रिक जानकारियां भी होंगी।

एक अधिकारी ने बताया कि एनपीआर देश के सामान्य निवासियों की एक सूची होगी। एक बार जब एनपीआर तैयार होकर प्रकाशित हो जाएगा तो संभावना है कि यह असम एनआरसी के देशव्यापी संस्करण ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस’ (एनआरआइसी) को तैयार करने का आधार बनेगा।

ये होंगे एनपीआर में शामिल

एनपीआर के लिए एक सामान्य निवासी उसे माना जाएगा जो उस स्थानीय इलाके में पिछले छह महीने या उससे अधिक समय से रह रहा हो अथवा जो उस इलाके में छह महीने या इससे अधिक समय तक रहने का इरादा रखता हो।

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